Friday, December 7, 2018

بعد تسريب الأصوات.. أغرب اختيارات الصحفيين للكرة الذهبية

وجه يورغن كلوب المدير الفني لليفربول الإنجليزي انتقادا مبطنا لمهاجم الفريق محمد صلاح، مشيرا إلى أنه "كان بإمكانه تسجيل أهداف أكثر هذا الموسم، نظرا إلى كم الفرص التي تتاح له أمام المرمى".
وسجل صلاح 44 هدفا في جميع المسابقات الموسم الماضي، لكنه حتى الآن أحرز 9 أهداف في 20 مباراة بكل المسابقات، بينما يحتل المركز التاسع في قائمة هدافي الدوري الإنجليزي الممتاز برصيد 7 أهداق.
وقال المدرب الألماني في مؤتمر صحفي، إن صلاح "كان بإمكانه أن يسجل أكثر مع الفرص التي أتيحت له، لكن لا يوجد شيء آخر يمكن قوله".
لكن على الجانب الآخر، يشعر كلوب بالإحباط من منتقدي صلاح، مشيرا إلى أن "كل شيء جيد"، ودعا إلى عدم الحكم على اللاعبين خلال الموسم، وإنما بعده.
وتابع: "أعتقد أنه سجل 7 أهداف حتى الآن في الدوري. من سجل أكثر؟ أوباميانغ (مهاجم أرسنال)؟ سجل هدفين في المباراة الأخيرة، لذا لم يكن أحد على بعد 15 هدفا مثلا".
وقال: "هكذا يجري الموسم وعلينا جميعا أن نبدأ من جديد. لا يمكنك أن تأخذ أي شيء على أنه مسلم به، أو تعتقد أن الأمور ستكون سهلة هكذا".
ويبدو أن كلوب كان يوجه حديثه لصلاح عندما أضاف: "جرب وأعد نفسك للمباراة المقبلة، حاول أن تفعل أفضل ما عندك وبعد ذلك ستحصل على الحكم خلال الموسم وليس من بدايته الموسم. يمكنكم بالطبع الحكم لكن بالنسبة إلينا، هذا ليس مهما حقا".
وأضاف أنه "طالما أن اللاعبين يتمتعون باللياقة والصحة والتركيز ومستعدين للتدريب وعلى استعداد للعمل، فأنا على ما يرام تماما".
وبعد فوزه المتأخر الرائع في ديربي ميرسيسايد ضد إيفرتون، الأحد، يزور ليفربول بيرنلي، الأربعاء، وعينه على الفوز وحده للاستمرار في مطاردة مانشستر سيتي المتصدرنشرت صحيفة "ماركا" الإسبانية قائمة مسربة لأسماء جميع الصحفيين الذين صوتوا في مسابقة الكرة الذهبية، مع اختياراتهم التي منحت الكرواتي لوكا مودريتش اللقب لأول مرة في تاريخه.
وكشفت قائمة الصحفيين عن خيارات "غريبة" نوعا ما، و"منحازة" أحيانا، لتثير الشكوك بشأن مصداقية أعرق جائزة كرة قدم فردية في العالم.
وتمنح الكرة الذهبية حق التصويت لصحفي واحد من كل دولة في العالم، يرشح كل فيها قائمته بأفضل 5 لاعبين بالعالم، لتمنح الجائزة بعدها للاعب الحائز على أعلى عدد من الأصوات.
ومن الاختيارات الغريبة، اختيار الفرنسي كريم بنزيمة كأفضل لاعب في العالم، من قبل الصحفي الموكل من جمهورية أفريقيا الوسطى.
أما الصحفي الممثل لدولة قيرغستان، فاختار الحارس البلجيكي تيبو كورتوا، كأفضل لاعب في العالم.
وحصل المدافع الفرنسي رافاييل فاران على المركز الأول، في أصوات لوكسمبورغ والهند وسورينام، فيما صوت الصحفي من غرانادا للمهاجم الأرجنتيني سيرجيو أغويرو.
أصوات منحازة
واتباعا لعداوة بلده الشهيرة مع الأرجنتين، لم يضع الصحفي البرازيلي كليبير ماتشادو الأرجنتيني ليونيل ميسي ضمن قائمة الخمس الأوائل.
وفي المقابل، اختار الصحفي الأرجنتيني إنريكه وولف البرتغالي كريستيانو رونالدو، غريم ميسي، في المركز الخامس، وأبعده عن الصدارة.
ووضع صحفي السنغال نجم منتخب بلاده ساديو ماني ضمن قائمة الخمس الأوائل، فيما حصل النجم المصري محمد صلاح على غالبية أصواته من الصحفيين العرب.
ويرى متابعون أن مثل هذه الاختيارات قد تشكك بمصداقية الجائزة المرموقة، التي قد تؤثر فيها الانتماءات والاختيارات العاطفية أو غير المنطقية للبعض

Tuesday, November 20, 2018

هل يساعد فحص مدته 5 دقائق على رصد الخرف مبكرا؟

قال باحثون إنهم توصلوا إلى فحص يستغرق خمس دقائق ويمكنه رصد الأشخاص المعرضين لخطر الإصابة بمرض الخَرَف قبل ظهور أعراضه.
واستخدم علماء أجهزة تصوير بالموجات فوق الصوتية لفحص الأوعية الدموية في رقاب أكثر من 3 آلاف شخص، ثم قاموا بمتابعة حالاتهم على مدار 15 عاما.
وتوصلوا إلى أن الذين يعانون من السرعة الشديدة في النبضات تطورت حالتهم إلى الإصابة بالتدهور المعرفي على مدار العقد التالي بنسبة أكبر.
ويأمل الباحثون في أن يقدم هذا الفحص وسيلة جديدة للتنبؤ بالتدهور المعرفي.
وقاس فريق دولي من الخبراء، تحت إشراف جامعة كوليدج لندن، شدة النبض الذي ينتقل إلى الدماغ في 3,191 شخصا عام 2002.
وتوصل الفريق إلى أن النبض الذي يتسم بسرعة شديدة يمكنه أن يسبب تلفا في أوعية الدماغ الصغيرة، وإحداث تغييرات هيكلية في شبكة الأوعية الدموية بالدماغ وحالات نزيف طفيفة.
وعلى مدار الأعوام 15 التالية، راقب الباحثون قوة الذاكرة والقدرة على حل المشاكل لدى المشاركين في الدراسة.
وانتهت الدارسة إلى أن احتمال إظهار تدهور معرفي على مدار العقد التالي ارتفع بنسبة 50 في المئة بين مَن كانوا يعانون من سرعة شديدة في النبض في بداية الدراسة.
وعادة ما يكون التدهور المعرفي واحدا من الأعراض الأولى للخرف، لكن ليس بالضرورة أن ينتهي الأمر بإصابة كل شخص يعاني منه بالخرف.
وقال الباحثون إن الفحص قد يوفّر وسيلة جديدة لتحديد الأشخاص المعرضين لخطر الإصابة بالخَرَف، مما يساعد في الخضوع مبكرا للعلاج وإدخال التغييرات اللازمة على نمط الحياة.
وتشير الأدلة العلمية إلى أن التحكم في ضغط الدم والكوليسترول واتباع نظام صحي وممارسة الرياضة بانتظام وعدم التدخين يساعد على تجنب الإصابة بالمرض.
وقال سكوت تشيزا، من جامعة كوليدج لندن: "الخرف هو النتيجة النهائية لعقود من التدهور"، مضيفا أنه من الصعب للغاية فعل أي شيء للأشخاص الذين أصيبوا به.
وأضاف: "ما نحاول قوله إنه يتعين عليك التحرك مبكرا بأسرع درجة ممكنة، وبذل الجهد لتوفير طريقة جديدة لرصد أولئك الذين يرجح بالفعل إصابتهم بالمرض واستهدافهم".
ومع ذلك، لا تتضمن الدراسة بيانات عن المشاركين فيها الذين تطورت حالتهم إلى الإصابة بالخرف بالفعل.
ويخطط الباحثون في المرحلة القادمة لاستخدام التصوير بالرنين المغناطيسي لفحص ما إذا كانت عينات الدراسة تظهر كذلك تغيرات هيكلية ووظيفية داخل الدماغ التي قد تشرح أسباب حدوث التدهور المعرفي لديهم.
كما يرغب العلماء في اختبار ما إذا كان هذا الفحص يحسّن معدلات التنبؤ بمخاطر الخرف لدى المصابين به بالفعل.
وقالت كارول روتليدغ، من مركز أبحاث الزهايمر في بريطانيا، إنه ليس واضحا حتى الآن ما إذا كان هذا الفحص يمكنه تحسين فرص تشخيص الإصابة بالخرف.
وأضافت: "ما نعرفه حق المعرفة هو أن إمدادات الدم في الدماغ مهمة بقدر لا يصدق، والحفاظ على القلب وضغط الدم في حالة صحية جيدة أمر مرتبط بانخفاض مخاطر الإصابة بالخرف".

Tuesday, November 6, 2018

असम का ये बंगाली हिंदू गांव ऐसे हमलावरों के निशाने पर आ गया: ग्राउंड रिपोर्ट

असम के तिनसुकिया शहर से नेशनल हाईवे 37 पर महज 63 किलोमीटर आगे बढ़ने पर देश का सबसे लंबा ब्रिज धोला-सदिया पुल आ जाता है. अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां आकर इस पुल का उद्घाटन किया था जिसका नाम भूपेन हज़ारिका सेतु रखा गया है.
इस पुल के बिलकुल पास बाईं तरफ प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर को उतारने के लिए बनाया गया हेलीपैड शनिवार को हो रही बारिश में धुलकर चमकने लगा था. इस जगह से महज पांच सौ मीटर दूरी पर बसा है बीशोनिमुख खेरबाड़ी गांव, जहां के कई घरों से रुक -रुक कर रोने-बिलखने की आवाजे सुनाई पड़ रही थीं.
गांव में घुसते ही हाथ में आधुनिक राइफल लिए असम पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान दिखे. वो जिस कदर चौकन्ने खड़े दिखे, उससे साफ़ पता चल रहा था कि इस इलाके में कोई बड़ी वारदात हुई है.
दरअसल ये वही गांव है जहां पिछले गुरुवार की शांम करीब साढ़े सात बजे अज्ञात हमलावरों ने बंगाली मूल के पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. तब से यहां सरकार के मंत्रियों, पुलिस अधिकारियों, मीडिया के लोगों और विभिन्न नागरिक संगठनों के नेताओं का आना-जाना लगा है.
थोड़ी दूर आगे एक छोटे से नाले पर बने लोहे के पुल को पार करने के बाद पहला मकान छोड़कर जैसे ही मैं बांस और टीन की छत वाले दूसरे मकान के अंदर गया, वहां दरवाजे के बाहर जमींन पर एक महिला अपनी दो साल की बच्ची को छाती से चिपकाए बिलकुल गुमसुम बैठी हुई थी.
पास खड़ी एक दूसरी महिला से पूछने पर पता चला कि ये कोई और नहीं बल्कि गोलीबारी की घटना में मारे गए 22 साल के अविनाश बिस्वास की पत्नी उर्मिला है.
पति के बारे में पूछने पर वो चीख-चीख कर रोने लगती है. उर्मिला की शादी को केवल तीन साल ही हुए थे. उर्मिला के परिवार में तीन लोगों की हत्या की गई है.
हमलावर अविनाश के साथ 18 साल के छोटे भाई अनंत और 55 साल के चाचा श्यामलाल बिश्वास को घर से बुलाकर ले गए थे और बाद में उनकी हत्या कर दी.
हमले वाली शाम का जिक्र करते हुए उम्रिला ने बीबीसी को बताया, "मेरे पति और देवर खेत में काम करके घर लौटे थे और शाम को खेत से लाई सब्जियों को टोकरियों मे डालते हुए दोस्तों के साथ गप्पें लड़ा रहे थे. उस समय पड़ोस में रहने वाले धनंजय और सहदेब भी हमारे घर आए हुए थे. मैं घर के आंगन में बैठकर बर्तन धो रही थी. इसलिए मैंने कुछ समय के लिए अपनी बेटी को पति की गोद में दे दिया."
अपनी बात पूरी करने से पहले उर्मिला भावुक हो जाती हैं.
वो रोते हुए बताती हैं, "कुछ लोग सेना की वर्दी पहने हमारे घर में घुस आए. मैं जबतक कुछ सोच पाती वो मेरे पति, देवर और उनके दोनों दोस्तों को अपने साथ ले गए. जब मैं उनके पीछे गई तो उन लोगों ने मुझे धमकाया और कहा कि कुछ देर बाद छोड़ देगें. बेटी को मेरी गोद मे देते हुए पति ने कहा था चिंता मत करों मैं अभी आ रहा हूं. ये शब्द मैने अनके मुंह से आखरी बार सुना था. वे अब कभी नही आएंगे. हमलावरों ने मेरे बेगुनाह पति का शरीर गोलियों से छलनी कर दिया."
अपनी दो साल की बेटी के माथे पर हाथ फेरती हुई उर्मिला उससे कहती है,"सुनु (बेटी का नाम) अब तुमको प्यार करने के लिए पापा कभी नहीं आएंगे." उर्मिला और उसका पूरा परिवार चाहता है कि हमलावरों को कड़ी से कड़ी सजा मिले.
अपने छोटे भाई और दो बेटों को खो चुके 65 साल के मोहनलाल बिश्वास दुख में पूरी तरह टूट चुके हैं.
धीमी आवाज में वो कहते है,"मैंने अपने दो जवान बेटे और छोटे भाई को खोया है. आखिर हमारा कसूर क्या था? मेरे दोनों बेटे खेतों में काम करके हमारे परिवार की देखभाल कर रहे थे. अब हम बूढ़े पति-पत्नी का ख्याल कौन रखेगा. अविनाश तो चला गया. अब उसकी दो साल की बेटी और पत्नि की देखभाल कौन करेगा?"
मोहनलाल का परिवार करीब चार दशक पहले असम के नगांव जिले से आकर तिनसुकिया जिले के बीशोनिमुख खेरबाड़ी गांव में बस गया था.
वो पुरानी बातों को याद करते हुए कहते है,"हमें इस गांव में रहते हुए सालों गुजर गए लेकिन इस तरह की घटना कभी किसी के साथ नहीं हुई. हमारी ना किसी के साथ कोई दुश्मनी है और न ही किसी ने हमें पहले कभी धमकाया है."
अपने दोनों बेटों को याद करते हुए मोहनलाल कहते है,"आप सोच सकते है, मेरे दो जवान बेटों की एकसाथ हत्या हुई है. छोटे भाई को मार दिया गया. बेटों के गम में पत्नी की दिमागी हालत बिगड़ चुकी है. रात को नींद नहीं आती है. भूख मर चुकी है. घटना के तीन दिन बाद भी किसी ने कुछ नहीं खाया है. मैं गरीब और कमजोर हूं. दोषियों को कहां सजा दिला पाऊंगा. आप लोग ही मेरे बेटों के हत्यारों को उचित सजा दिलवा सकते है."
मोहनलाल की पत्नि शामोली बिश्वास अपने बटों की लाश को देखने के बाद से सदमे में हैं.
आंगन में बने छोटे से पूजा घर को दिखाती हुई कहती है,"मेरे दोनों बेटे मर गए. इस बार विश्वकर्मा पूजा आप लोगों को करना होगा."
इतना कहने के बाद वो फिर चुप हो जाती है.
बीशोनिमुख खेरबाड़ी गांव में हिंदू बंगालियों के करीब ढाई सौ घर है. अगर एक-दो घर को छोड़ दे तो यहां बसे सभी लोग अनुसूचित जाति के हैं, जो सालों तक ब्रह्मपुत्र नदी से मछलियां पकड़कर अपना गुजारा कर रहे थे. बाद में बाढ़ के कारण जब मछलियां पकड़ने का काम बंद हो गया तो ये लोग खेती में लग गए. यहां के लोग आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हैं.

Tuesday, October 2, 2018

海洋牧场如何确保“生态优先”?

月的一个普通的傍晚,七艘渔船排队从吕四渔港出发,驶向临近的吕泗渔场进行捕捞作业。与此同时,从不同省市赶来的冷链运输车正挤在渔场附近的路上,等待着下一批渔获上岸。
吕泗渔场是中国著名渔场,也是重要经济鱼类大黄鱼的产卵地。过去几十年的过度捕捞让大黄鱼资源几近枯竭,渔场生态严重退化。不过近几年,吕泗渔场的光景似乎触底反弹。
本地渔民庞裕昌说,2017年年末,他的一位老乡一网就打上来约莫价值四五十万元的渔获。“到了周末,很多上海人来这里买海鲜,住酒店都得提早订,”他笑称。业的再度红火似乎证明江苏省渔业部门对近海渔业资源的养护取得了一定成效。除了休渔时间从2个月延长到三个半月,渔业管理者已连续9年在休渔期内向吕泗渔场放流了共计约3000万尾大黄鱼鱼苗。
另一项引人注目的新措施则是从2015年开始的,以人工鱼礁投放为标志的“海洋牧场”建设。不仅仅是在吕泗渔场,这种人为营造海底生物栖息地的海洋资源养护措施,正在中国的海岸边迅速发展。海洋牧场是上世纪70年代兴起的一种渔业形式。最初的海洋牧场主要通过向海底投放废船、人造水泥鱼礁等,改变海底水流状态、便于藻类繁殖,以此吸引海底生物聚集和停留。现在,鱼苗放流和海草、海藻养殖也是“投礁型”牧场建设的重要组成部分。而在深海建设大型装备养殖高经济鱼类的“装备型”牧场,在中国还比较少见。在近海渔业的管控方面,近年来中国沿袭限制产能的思路,以渔船数量的控制、休渔期的增长和燃油补贴的减量为主。
但近一两年,更为激进的近海渔业资源养护方案显得紧迫起来。传统式的增殖放流只是增加了鱼苗量,无法从根本上改变人类活动侵扰带来的海底生态环境的退化,不能从根本上逆转海洋生物资源衰退的困境。要让海里源源不断“长出”更多的鱼,就必须为鱼群的生息繁衍营造合适的空间。
根据农业部数据,中国目前已建成的200多个海洋牧场,显示出良好的盈利能力。相比建设这些海洋牧场花费的56亿元,每年它们产生的直接经济效益则高达319亿元。另外,它们还成为旅游和海钓的好去处,每年接纳游客超过1600万人次。
因此,2017年10月,农业部发布了一份远期规划
据农业部的“保守估计”,这些海洋牧场全部建成后,每年带来的经济效益将超过150亿元。
当然,人工渔礁预计能增加的渔获量未必百分百准确。“计划实施的过程中可能还会出现一些不确定性,但是(建设海洋牧场)的效果会是明显的,”大连海洋大学研究渔港问题的桂劲松教授表示。
,计划至2025年将中国沿海的国家级海洋牧场示范区从42个增加到178个,将海洋牧场覆盖海域的面积从850平方公里增加至2700平方公里。为了实现这些目标,需要投放约5000万空立方米的人工渔礁。
不过,一些专家告诉中外对话,海洋牧场的建设并非易事,快速大规模推广所蕴含的风险也需要纳入考量。
中国科学院海洋研究所副所长杨红生博士指出,除了管理、规划和建设中可能出现的问题之外,对于从北到南海洋环境差异极大的中国,海洋牧场建设面临的最大难点正是选址。事实上,目前中国已经建成的海洋牧场集中于黄海及其周边,位于南海的海洋牧场示范区仅有9个,并且没有一个位于热带。
根据美国安全与环境执法局( 杨红生指出,海洋牧场计划因而面临着一个两难处境。一方面,科学的选址需要对海底环境进行全面的评估,因而具有相当的难度;另一方面,海洋牧场又不能太小或太破碎,一般而言一万公顷以下的海洋牧场无论在生态上还是经济上都不会表现太好。
让情况更加复杂的是,中国至今没有对海洋牧场的建设做出具体的规定,或是出台统一的国家标准。杨红生曾在接受《中国科学报》采访时表示,“在我国海洋牧场的建设实践中,海洋牧场的含义过于宽泛。”他指出,“投放人工鱼礁、增殖放流,甚至网箱养殖等经常被简单等同于海洋牧场建设,近海养殖和海洋牧场建设概念混淆,导致我国海洋牧场遍地开花。”
但是,由于国家计划在海洋牧场建设上投入总计191亿元人民币的高额资金,很多地方政府和企业很可能会为了争取投资而蜂拥进入海洋牧场领域,甚至可能会出现为了申请上国家示范项目而罔顾海洋生态专家意见的状况。
)对于人工礁石的指导意见,人工礁石需要避开多种自然生境,并且其建设方式也需要避免对自然生境的完整性构成威胁。这些受保护的自然生境包括珊瑚礁、海草床、长有贝类的礁石等。

Monday, September 24, 2018

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

पर्रिकर को  सितंबर को दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया था. पर्रिकर ने ख़ुद ही सीएम पद पर बने रहने में असमर्थता जताई थी. गोवा में बीजेपी नेतृत्व के संकट से जूझ रही है. पर्रिकर के अलावा दो और मंत्री फ़्रांसिस डिसुज़ा और पांडुरंग मदकाइकर भी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हैं.
समाजवादी पार्टी पूर्व प्रमुख और वर्तमान प्रमुख अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह अपने बेटे की एक रैली में शामिल हुए. इस रैली में अखिलेश, मुलायम और रामगोपाल यादव एक मंच पर दिखे. हाल ही में मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनाया था और
 में मुलायम सिंह यादव के परिवार में आई दरार के बाद पहली बार मुलायम सिंह, अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव एक मंच पर दिखे. 2016 में राज्य विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे.
उन्होंने मुलायम के समर्थन का दावा किया था.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि भारत बातचीत की पेशकश को पाकिस्तान की कमज़ोरी ना समझे. इमरान ने कहा है कि पाकिस्तान के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकराकर भारत ने अपनी अकड़ का ही परिचय दिया है.
ख़ान ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि भारतीय नेतृत्व अपने अहम को कम करेगा और बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. बातचीत के प्रस्ताव को कमज़ोरी के तौर पर नहीं देखना चाहिए क्योंकि दोनों देशों के बीच अमन से ही ग़रीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी जा सकती है.''
ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में किसी भी तरह के दबाव के सामने नहीं झुकेगा. भारत ने नियंत्रण रेखा पर बीएसएफ़ के एक जवान के सिरकलम के बाद न्यूयॉर्क में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की प्रस्तावित बैठक को रद्द करने का फ़ैसला किया है.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निकी हेली ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी पर बेहद तल्ख़ टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा कि रूहानी को शनिवार को सैन्य परेड के दौरान हुए हमले लिए अमरीका को ज़िम्मेदार ठहराने के बजाय 'ख़ुद को आईने में देखना चाहिए.'
उन्होंने कहा, ''हसन रूहानी ख़ूब बढ़-चढ़कर बातें कर रहे हैं. अमरीका इस तरह किए गए किसी भी आतंकी हमले की निंदा करता है, चाहे वो कहीं भी हो. मुझे लगता है कि रूहानी को अपने भीतर झांकना चाहिए. ईरान में लोग उनके ही ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, वो लंबे वक़्त से अपने ही लोगों का दमन करते आ रहे हैं. ईरानी लोगों ने बहुत कुछ बर्दाश्त कर लिया है. लेकिन फिर भी वो चाहें तो हमें इन सब चीज़ों के लिए ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं. उन्हें ख़ुद को आईने में देखना चाहिए.''
लगता है दोनों ओर के नेतृत्व के दरम्यान ये साबित करने की होड़ लगी हुई है कि कौन कितना बड़ा ड्रामेबाज़ है?
पर अब ये स्क्रिप्ट भी फ़टीचर होती जा रहा है कि पहले अच्छी-अच्छी बातें करो फिर अचानक गालम-गलोच पर उतर आओ.
उसके बाद कुछ दिनों के लिए ख़ामोश हो जाओ और फिर अच्छी-अच्छी बातें शुरु कर दो. ये फ़ॉर्मूला इतना फ़िल्मी हो चुका है कि जब भी भारत और पाकिस्तान की तरफ़ से कोई एक दूसरे के लिए अच्छी बात निकालता है तो दिल डूबने लगता है कि ख़ुदा न करे आगे कुछ बुरा होने वाला है.र एपिसोड में भरे बाज़ार में एक-दूसरे को जूता दिखाने का हर बार वही पुराना अंदाज़ गोपाल फ़ेरीवाले से लेकर असलम नाई तक सबको रट चुका है. भगवान के लिए और कुछ नहीं तो स्क्रिप्ट में ही कुछ बदलाव ले आओ, कोई सीन ही ऊपर नीचे कर दो.
मसलन यही कर लो कि अगर दिल्ली या इस्लामाबाद में से कोई एक कहे कि आओ सखी वार्तालाप-वार्तालाप खेलें तो सामने वाला इंकार न करे बल्कि आमने-सामने बैठकर आहिस्ता से मुस्कुराते हुए दूसरे को कुछ ऐसी गंदी बात कह दे कि अगले के कान और मुंह आग बबूला हो जाएं. और जब वो गुस्से में उठकर वॉक आउट करे तो दूसरा देश हैरत से पूछे क्या हुआ? कहां जा रहे हैं हुज़ूर? बातचीत का शौक पूरा हो गया क्या?
इससे दो फ़ायदें होंगे, बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी. और दुनिया के सामने ये भी कहा जा सकेगा कि मैं तो बातचीत करना चाहता हूं लेकिन ये नहीं करना चाहता. पहले मिलने पर राज़ी हो जाना और फिर कोई पुरानी बात अचानक याद आ जाने पर मिलने से इंकार कर देना और फिर हाथ लंबे कर-करके एक दूसरे को कोसना.
ये बच्चों और पतियों को स्कूल और काम पर भेजकर पिछली गली में खुलने वाले दरवाज़ों पर खड़ी पड़ोसनों को तो जंचता है लेकिन पड़ोसी देशों को बिलकुल नहीं जमता.
भले ही अंदर से कोई देश दूसरे के बारे में कितना क़मीना क्यों ना हो. ज के ज़माने में वैसे भी मार्केटिंग ही सबकुछ है. छूरी भी मारना हो तो ऐसे मुस्कुरा कर सफ़ाई से मारिए कि देखने वालों को पता ही न चले कि कब मार दी.
कुछ वक़्त तक जब भारत और पाकिस्तान एक दूसरे पर गुर्राते थे तो रूसी और अमरीकी उन्हें ठंडा करने के लिए दिल्ली और इस्लामाबाद की ओर दौड़ पड़ते थे.
अब तक मुझ जैसों को ये पता था कि भारत के बारे में पाकिस्तान की पॉलिसी फ़ौज तय करती है.
पर भारत की ओर से इस बार जिस लहजे में पाकिस्तान को झाड़ा जा रहा है उससे न जाने क्यों लगता है कि जैसे दिल्ली की नई पाकिस्तान पॉलिसी सुषमा स्वराज या अजीत डोभाल ने नहीं बल्कि अर्नब गोस्वामी ने बनाई है.
शाबाश! ऐसे ही लगे रहो ताकि दुनिया का मन लगा रहे.