Thursday, January 31, 2019

ट्रंप ने अपने ही ख़ुफ़िया प्रमुखों पर क्यों साधा निशाना

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने ही देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों को ईरान के मामले में अनुभवहीन कहा है और उत्तर कोरिया को लेकर किए गए उनके आंकलन को भी ख़ारिज कर दिया है.
ट्रंप ने ट्वीट करके कहा, "ईरान से सावधान रहो. ख़ुफ़िया अधिकारियों को दोबारा स्कूल में जाना चाहिए. "
अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने वैश्विक सुरक्षा ख़तरों को लेकर किए अपने आंकलन में कहा था कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना रहा है.
ट्रंप ने इसी से चिड़ कर ये प्रतिक्रिया दी है.
ख़ुफ़िया अधिकारियों ने अपने आंकलन में ये भी कहा था कि उत्तर कोरिया के अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने की संभावना नहीं है.
नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक डेन कोट्स और अन्य ख़ुफ़िया प्रमुखों ने मंगलवार को सीनेट के समक्ष अपनी द वर्ल्डवाइड थ्रेट एसेसमेंट रिपोर्ट (वैश्विक ख़तरों का आंकलन) पेश की थी.
बीते साल अमरीका साल 2015 में ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अलग हो गया था. राष्ट्रपति ट्रंप के इस फ़ैसले की न सिर्फ़ अमरीका बल्कि दुनियाभर में आलोचना हुई थी.
बीते साल ट्रंप ने उत्तर कोरिया के साथ राजनयिक रिश्ते बेहतर करने की दिशा में ठोस क़दम उठाते हुए उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ मुलाक़ात भी की थी.
इस मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि किम उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए सहमत हो गए हैं.
किम से मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि अब उत्तर कोरिया का परमाणु ख़तरा ख़त्म हो गया है. हालांकि कई विशेषज्ञों ने ट्रंप के इस दावे पर सवाल उठाए थे.
इस रिपोर्ट में रूस और चीन की ओर से होने वाले संभावित साइबर हमलों को लेकर भी चेताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दोनों ही देश साल 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशें कर सकते हैं.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया के नेता अपनी सत्ता के अस्तित्व के लिए विनाशकारी हथियारों को ज़रूरी मानते हैं और उत्तर कोरिया के अपने हथियार कार्यक्रम को समाप्त करने की संभावना नहीं है.
ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा है कि ईरान के ख़तरों के मामले में अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारी भोले हैं और ग़लत हैं.
ट्रंप ने कहा कि ईरान न सिर्फ़ मध्य पूर्व में बल्कि इसके बाहर भी परेशानी पैदा कर रहा है लेकिन अमरीका के 'बेकार ईरान समझौते' से अलग होने के बाद से वो काफ़ी बदल गया है.
हालांकि ट्रंप ने ये भी कहा कि ईरान अभी भी संभावित ख़तरों और संघर्ष का स्रोत बना हुआ है. उन्होंने हाल के दिनों में ईरान की ओर से दागे गए रॉकेटों का भी हवाला दिया.
सीनेट के समक्ष सीआईए की निदेशक गीना हास्पेल ने कहा था कि तकनीकी रूप से देखा जाए तो ईरान परमाणु समझौते का पालन कर रहा है.
अमरीका ने इस समझौते से अलग होकर ईरान पर और सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं.
हालांकि इंटेलिजेंस रिपोर्ट में चेताया गया है कि ईरान की क्षेत्रीय महत्वकांक्षाएं और बेहतर सैन्य क्षमताएं भविष्य में अमरीकी हितों के लिए ख़तरा हो सकते हैं.
बीते साल भी ट्रंप को डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं की ओर से घोर आलोचना का सामना करना पड़ा था. उन्होंने 2016 अमरीकी चुनावों में रूसी दख़ल के आरोपों पर रूस का बचाव किया था.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियां इस निष्कर्ष पर पहुंची थीं कि राष्ट्रपति चुनावों में रूस ने दख़ल दी. ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा था कि रूस चुनावों को डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के ख़िलाफ़ करने के प्रयास कर रहा था.
लेकिन जुलाई 2018 में हेल्सिंकी में रूसी राष्ट्रपति के साथ हुई सीधी मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा था कि रूस के पास अमरीकी चुनावों में दख़ल देने की कोई वजह नहीं है.
हालांकि, आलोचना होने के 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने अपने बयान से पलटने की कोशिश की थी.
अमरीका के विशेष जांच अधिकारी रॉबर्ट म्यूलर राष्ट्रपति चुनावों में रूसी दख़ल के आरोपों की स्वतंत्र जांच कर रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार ये कहते रहे हैं कि ये जांच उनसे बदला लेने की कोशिश है.

Monday, January 14, 2019

رأس "رمسيس" مثبتة بمسامير في متحف سوهاج تثير سخرية المصريين

حبست المراهقة الغاضبة نفسها مع الصحفية الأسترالية صوفي ماكنيل، رافضة ركوب الطائرة، وقامت بدلا من ذلك بتوثيق محنتها على تويتر.
وتضاعف عدد متابعيها بعد ذلك ووصلوا إلى أكثر من 66,400 شخص.
وقال مراسل بي بي سي في جنوب شرق آسيا جوناثان هيد إن الضجة الكبيرة التي أحدثتها وسائل التواصل الاجتماعي كانت عاملاً كبيراً في ما حدث لرهف بعد ذلك".
وأضاف: "كانت هذه قصة إنسانية في غاية القوة، وكانت تحدث مباشرة أمام أعيننا، وكانت نهايتها غير مؤكدة"كما قال فيل: "إن تزايد الدعم على تويتر لم يجذب [فقط] انتباه المراسلين ورؤساء التحرير، بل حظي باهتمام وسائل الإعلام التايلاندية. كما جذبت تغريداتها اهتمام الدبلوماسيين المحليين، إلى جانب كبار المسؤولين في مفوضية الأمم المتحدة للاجئين وعدد من الحكومات".
وأضاف: "لعب كل هذا دورا محوريا في حث تايلاند على إعادة التفكير في النهج الذي ستتبعه بعد أن اتضح لها أن رهف محمد القنون لن تغادر بهدوء".
وقال جوناثان هيد، مراسل بي بي سي: "حتى مساء يوم الأحد كان المسؤولون في تايلاند مصرين على أنهم سيعيدونها، أما وسائل الإعلام التايلاندية فلم تكن قد نقلت الخبر بعد. تغير كل ذلك مع صباح الاثنين".
اليوم رهف القنون آمنة، بعد أن أعلنت الأمم المتحدة أنها حصلت على صفة لاجئة.
بفضل براعتها في استخدام وسائل التواصل الاجتماعي، استطاعت رهف القنون أن تمسك بزمام الأمور من خلال الحشد لحملة قوية على الإنترنت لحماية نفسها.
وخرجت من هذه المحنة بـ 126,000 متابع على تويتر في الأيام الخمسة الأولى.
وفي حالة أخرى استخدمت فيها وسائل التواصل الاجتماعي بطريقة مشابهة، نجح شاب سوري تقطعت به السبل في مطار ماليزي لعدة أشهر في طلب اللجوء في كندا بعد نجاح حملته لدعم لقضيته على تويتر وفيسبوك.
لكن الحظ لم يكن حليف كل من تعرض للتهديد.
أثارت صورة متداولة على مواقع التواصل الاجتماعي لرأس تمثال أثري نادر للملك رمسيس في متحف سوهاج القومي بصعيد مصر موجة من السخرية والانتقادات نظرا لأن التمثال معروض مباشرة أمام الجمهور ومثبت بمسامير على الحائط بطريقة بدائية قد تؤدي إلى تضرره.
وقالت وزارة الآثار المصرية إنها ستحقق في صحة هذه الصور المتداولة وستتخذ الإجراءات اللازمة، وأوضحت الوزارة أن الوضع الذي التقط عليه التمثال لم يكن موجودا عند افتتاح المتحف قبل أربعة أشهر.
وسخر رواد مواقع التواصل الاجتماعي، من طريقة تعامل مسؤولي المتحف مع هذه الآثار الهامة وعرضها بهذه الطريقة "غير الاحترافية التي تؤدي لتشوية الأثر الفرعوني النادر وتضرره".
ولكن بعض مسؤولي وزارة الآثار أكد أن وضع التمثال بهذه الطريقة لا "يسبب مشكلة فنية للأثر ولكنه تشويه للمظهر الجمالي ولا يدخل في اختصاص الأثريين".
وتحدثت بي بي سي إلى إلهام صلاح الدين، رئيس قطاع المتاحف بوزارة الآثار المصرية، فقالت إن "هذا الإجراء متبع في العرض المتحفي ولا توجد أي مشكلة في تثبيت بعض القطع الأثرية الضخمة والثقيلة بهذه الطريقة".
وأوضحت المسؤولة المصرية أن "رأس التمثال المثبت بهذه القطعة المعدنية يزن أكثر من ربع طُن، 250 كيلو غراما، وأن المعدن المستخدم في التثبيت هو معدن الرصاص ويتم استخدامه بطريقة فنية معينة".
وأضافت: "يلجأ بعض مسؤولي العرض المتحفي إلى استخدام المسامير المعدنية بمواصفات معينة تتضمن تثبيت المسمار داخل جراب بلاستيكي مع طلاء الجزء الظاهر بمادة مطاطة عازلة لا تتغير بعوامل الرطوبة والتعرية".
وعن انتشار هذه الصور على مواقع التواصل الاجتماعي، اتهمت إلهام صلاح بعض موظفي المتحف بأنهم وراء نشرها بسبب خلافات داخلية، وأنهم نشروا تغريدات تبتعد كل البعد عن المهنية.
وناشدت رئيس قطاع المتاحف بوزارة الآثار وسائل الإعلام المختلفة بعدم الانسياق وراء ما سمته "بمحاولة تشويه للجهد المبذول في متحف سوهاج القومي"، الذي تم افتتاحه رسميا قبل أربعة أشهر ويضم 6 آلاف قطعة أثرية.
الوزارة تحقق
وأكد الدكتور هاني أبو العزم رئيس الإدارة المركزية لآثار مصر الوسطى، أن وزارة الآثار تتحقق من صحة الصور المنشورة عبر مواقع التواصل الاجتماعي، مشيرا أنه قام بزيارة لمتحف سوهاج القومي مؤخرا ولم يلاحظ وجود هذا المشهد.
ويوضح أبو العزم إنه إذا تأكد تثبيت التمثال بهذه الطريقة فإن الأمر يعد تشويهًا للتمثال.
ويوضح دكتور أبو العزم أن تمثال "رمسيس الثاني" المعروض بالمتحف المصري الكبير حاليا مثبت "بخوابير معدنية" دون إظهار ذلك في الشكل العام أمام الجميع، لكن ظهورها أمام الزائرين أمر غير جيد.

  أما دكتور خالد شاهين الأستاذ بكلية الآثار جامعة القاهرة، فيرى أن "تثبيت التمثال بهذه الطريقة يعد تشويها للأثر ويخل بسيناريو العرض المتحفي وقد يؤدي بمرور الوقت إلى تهشم بعض أجزاء من الرأس.

وأوضح أن تثبيت تمثال رمسيس بدعامات معدنية كان بغرض النقل من منطقة باب الحديد إلى موقع العرض المفتوح بالمتحف المصري الجديد حفاظا على الأثر خلال عملية النقل وأن هذه الدعامات المعدنية سوف يتم إزالتها مع بدء العرض المتحفي الرسمي.
وحذر شاهين من أن "المعدن المستخدم في التثبيت قد يصدأ ويتآكل بمرور الوقت وقد تؤدي عوامل التعرية المصاحبة لظاهرة الصدأ في تهشم الأجزاء الملاصقة للمعدن".
وعدد خبير الآثار الحلول لتثبيت القطع الأثرية في العرض المتحفي ومنها صناعة دعامات حجرية أو ملاصقة القطعة الأثرية لجدار ثابت أو وضع القطع المهمة داخل أماكن عرض مغلقة في ظروف جوية مناسبة.
وافتتح متحف سوهاج القومي رسميا أمام الجمهور في شهر أغسطس/ آب الماضي لينضم إلى قائمة المزارات المهمة في منطقة صعيد مصر.
وترغب الحكومة المصرية في زيادة التدفق السياحي على المتحف عن طريق إقامته على الضفة الشرقية لنهر النيل في طريق البواخر النيلية السياحية، على مساحة 5 آلاف متر مربع بتكلفة إجمالية بلغت 72 مليون جنيه (4 ملايين دولار).